करुणा की विजय

संध्या की दीनता गोधूलि के साथ दरिद्र मोहन की रिक्त थाली में धूल भर रही है. नगरोपकंठ में एक कुएं …

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उस पार का योगी

सामने संध्या से धूसरित जल की एक चादर बिछी है. उस के बाद बालू की बेला है, उस में अठखेलियां …

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सम्राट

सादिक साम्राज्य की प्रजा ने विद्रोह के नारे लगाते हुए अपने सम्राट का महल घेर लिया। सम्राट राजमहल की सीढ़ियों …

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भिखारिन

जाह्नवी अपने बालू के कम्बल में ठिठुरकर सो रही थी। शीत कुहासा बनकर प्रत्यक्ष हो रहा था। दो-चार धाराएँ प्राची …

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रूप की छाया

काशी के घाटों की सौध श्रेणी जाह्नवी के पश्चिम तट पर धवल शैल माला-सी खड़ी है। उनके पीछे दिवाकर छिप …

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